RewriteCond %{HTTPS_HOST}^mathsguruji\.info[NC] RewriteRule(.*)https://www.mathsguruji.info/$1 [L,R=301] Number system - संख्या पद्धति

Number system - संख्या पद्धति

Number System- Types of Numbers, its face value and positional value

number system

नमस्कार दोस्तों, mathsguru.info आप सभी का स्वागत करती है. आज इस पोस्ट में हम Number System के Basics के बारे में जानेंगे की number system क्या है, इसका संख्यात्मक मान और  स्थानीय मान क्या होता है तथा कितने प्रकार के Numbers होते है आदि. 



 Number system - संख्या पद्धति


एक या एक से अधिक अंकों के मिश्रण से बने समूह को संख्या कहते हैं जैसे 1, 10, 25, 432 । किसी भी संख्‍या को दर्शाने के  लिए एक विशेष Number System का प्रयोग किया जाता हैं। प्रत्‍येक Number System में प्रयोग किए जाने वाले अंक या अंको के समूह से उसको दर्शाया  जाता हैं। प्रत्‍येक संख्‍या का एक निश्चित आधार (Base) होता हैं। जो उस Number System में प्रयोग किए जाने वाले मूल अंकों (Basic Digits) की संख्‍या के बराबर होता हैं। किसी भी संख्‍या में अंको (Digits) की स्थिति दायीं से बायीं ओर गिनी जाती हैं। किसी संख्‍या में प्रत्‍येक अंक का मान उसके संख्‍यात्‍मक मान (Face Value) तथा स्‍थानीय मान (Position Value) पर निर्भर करता हैं। किसी संख्‍या का कुल मान (Value) प्रत्‍येक अंक के मान का योगफल होता हैं।Decimal number System सर्वाधिक प्राचीन और सबसे प्रचलित संख्‍या पद्धति हैं।


आधार (Base)


किसी संख्‍या को निरूपित (Denote) करने के लिए प्रयोग की जाने वाली मूल अंकों (Basic Digits) की कुल संख्‍या उस Number System का आधार कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, Decimal number System में सभी संख्‍याओं को 10 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, तथा 9) से निरूपित किया जाता हैं। अत: इसका आधार 10 हैं। Binary Number System  में 2 मूल अंकों (0 तथा 1 ) का प्रयोग किया जाता हैं। अत: इसका आधार 2 हैं। Octal number System में आठ मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, तथा 7) का प्रयोग होता हैं, अत: इसका आधार 8 हैं। Hexadecimal Number System का आधार 16 है क्‍योंकि इसमें सभी संख्‍याओं को 16 मूल अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, A, B, C, D तथा E) से दर्शाया जाता हैं।

 संख्‍यात्‍मक मान (Numerical value)


किसी संख्‍या में किसी अंक की Numerical value उस संख्‍या की स्थिति पर निर्भर करती हैं। संख्‍या में अंकों की स्थिति को दायीं से बायीं ओर गिना जाता हैं। सबसे दांयी और अर्थात इकाई के स्‍थान पर स्थित अंक की Numerical value ‘0’ होगी। दहाई के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘1’ , सैकड़े के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘2’ जबकि हजार के अंक का संख्‍यात्‍मक मान ‘3’ होता हैं।

स्‍थानीय मान (Position Value) 


किसी संख्‍या में किसी अंक का स्‍थानीय मान संख्‍या के आधार तथा उस‍के संख्‍यात्‍मक मान पर निर्भर करता हैं। किसी संख्‍या का स्‍थानीय मान संख्‍या के आधार पर संख्‍यात्‍मक मान के घात के बराबर होता हैं।
स्‍थानीय मान = (आधार)संख्‍यात्‍मक मान
Position Value = (Base)Face Value
किसी संख्‍या का मान प्रत्‍येक अंक के संख्‍यात्‍मक मान तथा स्‍थानीय मान के गुणनफल का योग होता हैं।

संख्या पद्धति ( Number Systemमें जिसका सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है वह है दशमलव अंकन पद्धति  हम संख्या पद्धति के अंतर्गत सबसे पहले संख्याओं के वर्गीकरण के बारे में जानेगे।

संख्याओं का वर्गीकरण( Types of Numbers)


1 . प्राकृत संख्याएं (Natural Numbers) -


     गिनती में प्रयोग होने वाली संख्याओं के समुच्चय को प्राकृत संख्याओं का समुच्चय कहा जाता है। उन्हें गिनती की संख्या भी कहते हैं। इसे (N) से दर्शाते हैं। इसमें  1 से अनन्त तक की संख्याएं  आती हैं 

उदाहरण (Example) = N: {1,2,3,4, - - - - - - - - - - -⧞  }

2 .  पूर्ण संख्याएं (Whole Numbers )  -


जब प्राकृत संख्याओं के समुच्चय में 0 को शामिल कर लिया जाता है तो पूर्ण संख्याओं का 
समुच्चय बन जाता है। इसे (W) से दर्शाते हैं I इसमें 0 से  अनन्त तक की संख्याएं  आती हैं 

उदाहरण (Example) = W: {0,1,2,3,4, - - - - - - - - - - - ⧞  }

3. पूर्णांक संख्याएं (Integer Numbers) -


जब पूर्ण संख्याओं के समुच्चय में ऋणात्मक चिन्ह के साथ प्राकृत संख्याओं को भी शामिल कर लिया जाता है तब पूर्णांक संख्याओं का समुच्चय बन जाता है  इसे  ( I )  से दर्शाते हैं I इसमें -⧞  से  +⧞   तक की संख्याएं  आती हैं 

उदाहरण (Example) = I: {-⧞ - ,- - - - - - - - 3,-2,-1,0,1,2,3,4, - - - - - - - - - - - ⧞  }

4. सम संख्याएं (Even Numbers) -


इसे (E)  से दर्शाते हैं I सम संख्याएं 2 से विभाजित होती हैं . अतः ऐसे संख्याओं का समुच्चय जो 2 से विभाजित हो सम संख्या कहलाती है।

उदाहरण (Example) = E:  {2,4,6,8,10 - - - - - - - }

5. विषम संख्याएं (Odd Numbers) - 


से पूर्ण रुप से विभाजित नहीं होने वाली प्राकृतिक संख्याओं के समुच्चय को विषम संख्याओं कासमुच्चय कहा जाता है दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि जो प्राकृत संख्या सम संख्या नहींहै वह विषम संख्या है या ऐसी संख्याएं जो स्वयं और स्वयं के गुणनखंड से विभाजित होती हैं I
 इसे (O)  से दर्शाते हैं I

उदाहरण (Example) = O: {1,3,5,7,9 - - - - - - -}

6. परिमेय संख्याएं (Rational Numbers) -  


ऐसी संख्याओं का समुच्चय  जिसे P/q के रूप में लिखा जा सकता हो और जहां p  और q  कोई दोआपस में  अभाज्य पूर्णांक संख्याएं हैं और q#0, उसे परिमेय संख्याओं का समुच्चय कहा जाता है।

उदाहरण (Example) = ( 2, 3/5 , 1/5 )

7. अपरिमेय संख्याएं (Irrational numbers) -


ऐसी संख्याओं का समुच्चय  जिसे P/q के रूप में लिखा नहीं जा सकता है I जहां p  और q  कोई पूर्णांक संख्याएं हैं I अपरिमेय संख्याये कहलाती है।

उदाहरण(Example)=(√3,√2), 

यह भिंन्न या दशमलव संख्या के रूप में सन्निकट उत्तर देता है इनमे दशमलव के बाद का अं अनन्त तथा अनावर्ती(non-terminating non-recurring)होता है।यही π=22/7=3.14159.....के लिए भी होता है जो फिर एक अपरिमेय संख्या है  दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अपरिमेय संख्याएं एक infinite, non-recurring decimal numbers है 

8. रूढ़ संख्याएं (Prime numbers) -  


 रूढ़ संख्याएं वह संख्याएं होती हैं जो 1 और स्वयं के अलावा किसी और से विभाजित नहीं होती हैं 

उदाहरण (Example) = ( 2,3,5,7,11,17,19,23 - - - - - - - - - - )
नोट-
1.2 ही एक ऐसी सम संख्या है जो रूढ़ संख्या भी है बल्कि दो से ही रूढ़ संख्या शुरू होती है।
2.2 के अलावा और सभी रूढ़ संख्याएं विषम संख्या है लेकिन सारी विषम संख्या है रूढ़ संख्या नहीं होती है।

9. यौगिक संख्याएं( Composite Numbers)-


एक से बड़ी वैसी संख्याओं का समुच्चय जिसके सदस्य के घटक या गुणनखंड एक और स्वयं के अलावा भी हो योगिक संख्याओं का समुच्चय कहलाते हैं।

उदाहरण(example): 4,6,9,14,15......


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